बोलती तस्वीरेंशिक्षासोशल मीडिया

अब ईको फ्रेंडली सड़कों पर चलें:गूगल मैप ऐसे रास्ते बताएगा जिन पर बहुत कम होंगी जहरीली गैसें, यह बाई डिफॉल्ट होगा, दूसरे रास्तों पर पॉल्यूशन से कर सकेंगे तुलना

स्मार्ट फोन के इस दौर में गूगल मैप हमारा मार्गदर्शक बना हुआ है। कैब से कहीं जाना हो या रेस्टोरेंट से घर पर खाना मंगाना, गूगल मैप के बिना इन सर्विस के बारे में सोचा भी नहीं जा सकता। गूगल हमारी इस जरूरत को ईको फ्रेंडली बनाने जा रहा है। गूगल मैप्स जल्द ही लोगों को सबसे कम प्रदूषण वाले ईको फ्रेंडली रास्तों से उनकी मंजिल तक पहुंचाएगा। यानी यह ऐसे रास्ते होंगे जहां प्रदूषण का स्तर कम हो।

गूगल का कहना है कि गूगल मैप्स के इस नए ईको फ्रेंडली फीचर की शुरुआत इस साल के आखिर तक अमेरिका में होगी और इसके बाद बाकी देशों में इसे लॉन्च किया जाएगा।

अब तक गूगल मैप्स सबसे छोटा रास्ता या ऐसा रास्ता बताता है जिनसे कम से कम समय लगे। जाम या किसी तरह की रुकावट होने पर भी वैकल्पिक रास्ते बताता है।

कैसे काम करेगा यह फीचर?

  1. डिफॉल्ट फीचर होगा लॉन्च होने के बाद गूगल मैप्स बाई डिफॉल्ट ईको फ्रेंडली रास्ते ही दिखाएगा। यूजर्स को वैकल्पिक रास्तों पर जाने के लिए इस डिफॉल्ट सेटिंग से बाहर आना होगा।
  2. दूसरे रास्ते भी सुझाएगा ईको फ्रेंडली रास्तों के मुकाबले वैकल्पिक रास्तों के ज्यादा तेज होने पर गूगल मैप्स दोनों विकल्प दिखाएगा। ऐसे स्थिति में यूजर्स के सामने दोनों रास्तों पर ग्रीन हाउस गैसों का आंकड़ा होगा। इनकी तुलना करके यूजर किसी एक रास्ते को अपना सकेंगे।
  3. आधे रास्तों के लिए मिले ग्रीन रोड गूगल मैप्स के इस प्रोडक्ट के डायरेक्टर रसल डिकर का कहना है कि गूगल ने अमेरिका में जिन भी रास्तों का विश्लेषण किया, उनमें से 50% के लिए उसने बिना किसी बड़े नुकसान के वैकल्पिक ईको फ्रेंडली रास्ते बता दिए।

गाड़ियों की संख्या से लेकर, ढलान-चढ़ाई के डेटा से लेकर, सैटेलाइट तस्वीरों का होगा इस्तेमाल

गूगल ने सड़कों पर ग्रीन हाउस गैसों का अनुमान लगाने के लिए अलग-अलग रास्तों से गुजरने वाले वाहनों की संख्या, वाहनों के प्रकार (डीजल, पेट्रोल या सीएनजी), सड़कों के प्रकार के साथ अमेरिकी सरकार के नेशनल रिन्यूएबल एनर्जी लैब (एनआरईएल) का डेटा इस्तेमाल किया। इनमें सड़कों की ढलान और चढ़ाई जैसा डेटा भी शामिल है।

वहीं गूगल ने अपनी स्ट्रीट व्यू गाड़ियों के साथ ड्रोन और सैटेलाइट तस्वीरों का भी इस्तेमाल किया। इसी तरह बाकी देशों में ग्रीन रूट्स की पहचान की जाएगी।

आप कम ग्रीन हाउस गैसों वाले इलाकों से गुजर रहे हैं…जून से मिलेगी चेतावनी

इसके अलावा जून 2021 से गूगल ड्राइवरों को कम कार्बन गैसों वाले इलाकों से यात्रा करने के बारे में भी चेतावनी देना शुरू करेगा। जर्मनी, फ्रांस और नीदरलैंड जैसे देशों में ऐसे कम कार्बन गैसों वाले इलाकों में वाहनों पर पाबंदी है।

रास्तों के साथ अलग-अलग मोड की कर सकेंगे तुलना

इस साल के अंत तक गूगल मैप्स एक और फीचर शुरू करेगा। इसमें यूजर को रास्तों के विकल्प तो मिलेंगे ही, साथ ही वह यात्रा करने के अलग-अलग तरीकों के बीच एक ही जगह पर तुलना भी कर सकेगा। जैसे कार, साइकिल, पब्लिक ट्रांसपोर्ट आदि। अभी तक अलग-अलग मोड से यात्रा के विकल्पों की तुलना करने के लिए बार-बार यूजर को मोड पर स्विच करना होता है।

मौसम और एयर क्वालिटी मैप भी हो रहे तैयार

गूगल मौसम और हवा की गुणवत्ता के आधार पर नए मैप (वेदर एंड एयर क्वालिटी लेयर मैप) तैयार कर रहा है। इन्हें आने वाले महीनों में एंड्रॉयड और आईओएस दोनों प्लेटफॉर्म्स के लिए रोल-आउट किया जाएगा। एक रिपोर्ट के मुताबिक यह मैप सबसे पहले ऑस्ट्रेलिया, भारत और अमेरिका में लॉन्च किया जाएगा।

हमारी हेल्थ के लिए बेहद खतरनाक है सड़कों का पॉल्यूशन

हाईवे पर गाड़ियों से सल्फर डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, ऑक्साइड्स ऑफ नाइट्रोजन, लेड, पार्टिक्युलेट मैटर जैसे प्रदूषण फैलाने वाली गैस और कण निकलते हैं। इनके अलावा खास केमिकल रिएक्शन से ओजोन भी बनती है। यह सभी हमारी हेल्थ के लिए बेहद नुकसानदायक हैं।

  1. सल्फर डाईऑक्साइड (SO2): अस्थमा रोगियों के लिए बेहद खतरनाक हवा में इस बेरंग गैस की छोटी सी मात्रा अस्थमा रोगियों के फेफड़ों की क्षमता बेहद कम कर सकती है। छाती में जकड़न और तेज खांसी भी उठ सकती है। तबियत इतनी बिगड़ सकती है कि मेडिकल हेल्प की जरूरत पड़ सकती है। सल्फर डाइऑक्साइड का प्रदूषण धूल के साथ मिलकर और खतरनाक हो जाता है।
  2. कार्बन मोनोऑक्साइड (CO): दिल-दिमाग की ऑक्सीजन सप्लाई पर असर यह रंगहीन, गंधहीन और स्वादहीन गैस है। यह गैस शरीर में खून के जरिए ऑक्सीजन की सप्लाई को रोक देती है। इससे सबसे ज्यादा असर दिल और दिमाग पर पड़ता है। दिल के मरीजों के लिए खासतौर पर खतरनाक है।
  3. ऑक्साइड्स ऑफ नाइट्रोजन (NO, NO2): फ्लू से लड़ने की क्षमता करती है खत्म बेहद ज्यादा तापमान पर कम्बशन के दौरान हवा और ईंधन में मौजूद नाइट्रोजन के ऑक्सीकरण से नाइट्रोजन के ऑक्साइड जैसे नाइट्रिक ऑक्साइड (NO), नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO2) बनते हैं। NO2 फेफड़ों में इंफ्लूएंजा जैसे संक्रमण से लड़ने की क्षमता को कम करती है। लंबे समय तक इन गैसों के संपर्क में आने से बच्चों में एक्यूट रेसपिरेटरी इलनेस (दमा) की संभावना बढ़ जाती है।
  4. लेड यानी सीसा (Pb): रुक जाता है बच्चों का मानसिक विकास नवजात और बच्चों के लिए लेड की छोटी मात्रा भी काफी नुकसानदायक होती है। इससे उनका मानसिक विकास रुक सकता है। इधर-उधर देखने की क्षमता के साथ मस्तिष्क को नुकसान पहुंचता है। उनकी याद्दाश्त के साथ ध्यान लगाने की क्षमता भी कमजोर पड़ सकती है।
  5. पार्टिकुलेट मैटर: फेफड़ों में सूजन, दिल पर असर धूल और प्रदूषण के बेहद छोटे कणों को पार्टिकुलेट कहते हैं। यह कण बहुत आसानी से फेफड़ों में गहराई तक चले जाते हैं। इनसे फेफड़ों में संक्रमण और सूजन हो सकती है। दिल और फेफड़ों की बीमारियों से ग्रसित लोगों के लिए बहुत खतरनाक होते हैं।
  6. ओजोन (O3): फेफड़ों के लिए बेहद नुकसानदायक ग्राउंड लेवल ओजोन (O3) दूसरे प्रदूषक तत्वों की तरह सीधे वाहनों से नहीं फैलती, यह नाइट्रोजन ऑक्साइड (NO2), हाइड्रोकार्बन और सूरज की रोशनी की क्रिया से बनता है। यह ओजोन फेफड़ों में जाकर अस्थमा जैसी दूसरी बीमारियों से घिरे लोगों की दिक्कत को बढ़ा देती है।

Bol Bharat

Bol Bharat is your news, entertainment, music fashion website. We provide you with the latest breaking news and videos straight from the entertainment industry.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button